सभी घुमक्कड साथियों को दशहरे की हार्दिक
शुभकामनायें तथा आने वाली दिवाली की अग्रिम शुभकामनाएं. पिछली पोस्ट में
मैने अपलोगों को हमारी रोहतांग की बर्फिली यात्रा के बारे में बताया था, और
लीजिए अब आपको आगे की यात्रा पर ले चलता हूँ. आज YHAI कैम्प में हमारा
चौथा और अंतिम दिन था, और अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आज 22 मई को हमें
अपनी इस हिमाचल यात्रा के अंतिम पड़ाव यानी “बिजली महादेव” का सफर करना था.
कैम्प में तीन चार दिन साथ रहने से बहुत से लोगों से परिचय हो गया था और
कुछेक से आत्मीयता भी. काल रात की जबरदस्त थकान के चलते सोते समय ही निश्चय
किया था की सुबह देर तक सोएंगे और देर से ही बिजली महादेव के लिए निकलेंगे
सो सुबह आराम से ही उठे और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर नाश्ता करने के
लिये फुड ज़ोन की ओर चल दिए. कैम्प के कुछ लोग पिछले दिन बिजली महादेव जाकर
आ चुके थे और हमें आज जाना था सो हमने उनलोगों से बात करके जानकारी ले
लेना उचित समझा. सभी का कहना था की जगह तो बहुत सुन्दर है, माइंड ब्लोइंग
है लेकिन रास्ता बहुत कठिन है, बल्कि कठिन के बजाए दुर्गम कहना ज्यादा सही
होगा. दरअसल बिजली महादेव एक पर्वत के शिखर पर स्थित है तथा वहां तक जाने
के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं होता, करीब दो घंटे की खड़ी चढ़ाई पैदल ही तय
करनी पड़ती है, यहाँ तक की घोड़े भी उपलब्ध नहीं होते.
हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत शहर कुल्लू ब्यास
नदी के तट पर 1230 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. जो प्राचीन काल में सनातन
धर्म के देवी देवताओं का स्थायी बसेरा था. कुल्लू का बिजली महादेव मंदिर
अथवा मक्खन महादेव संसार का अनूठा एवं अदभुत शिव मंदिर है, यह मंदिर ब्यास
नदी के किनारे मनाली से करीब 50 किलोमीटर दूर समुद्र स्तर से 2450 मीटर की
ऊंचाई पर स्थित है. कुल्लू से कुछ 15 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव पड़ता है
चंसारी वहां तक तो वाहन से जाने का रास्ता है लेकिन उसके बाद यात्रियों को
5 किलोमीटर पैदल ही चलना पड़ता है।
एक स्थानीय युवक काम पर जाते हुए..