Friday, 13 December 2013

त्र्यंबकम गौतमीतटे …….त्र्यंबकेश्वर से शिर्डी

भीमाशंकर प्रवास तथा वहां के रात्री विश्राम की खट्टी मीठी यादें मन में संजोए अब हम अपने अगले गंतव्य त्र्यंबकेश्वर की यात्रा प्रारंभ करने की गरज़ से सुबह करीब नौ बजे बस स्टेंड पर आ गए, चुंकि भीमाशंकर से नाशिक के लिये सीधी बस नहीं मिलती है अत: हमें मंचर नामक जगह से नाशिक की बस पकड़नी थी, हम लोग लगभग दो घंटे में मंचर पहुंच गए।
मंचर में करीब आधे घंटे के इंतज़ार के बाद हमें नाशिक के लिये बस मिल गई और शाम चार बजे हम लोग नाशिक पहुंच गए। भीमाशंकर से निकलते समय घना कोहरा जरुर था लेकिन बारीश नहीं हो रही थी, पर अब नाशिक पहुंचते पहुंचते बारीश शुरु हो गई थी। बारीश की हल्की फ़ुहारों के बीच ही हम नाशिक के बस स्टेंड पर उतरे और हमें त्र्यंबकेश्वर के लिये तैयार खड़ी बस मिल गई। बस में सवार होकर बारीश का आनंद लेते हुए हम कब त्र्यंबकेश्वर पहुंच गए पता ही नहीं चला।
Welcome to Tryambakeshwar
Welcome to Tryambakeshwaron

Wednesday, 30 October 2013

डाकिन्यां भीमशंकरम ………..भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा.

पिछ्ली पोस्ट इंदौर से पुणे में आप लोगों ने पढा कि हम लोग भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा के लिये इन्दौर से पुणे पहुंचे, वहां रात्री विश्राम करके अगले दिन पुणे के प्रसिद्ध दगड़ुशेठ गणपती मंदिर के दर्शन किये तथा नाश्ता करके अपने होटल पहुंच गये…….अब आगे……
आज हमें महाराष्ट्र परिवहन की बस से लगभग चार घंटे का सफ़र तय करके पुणे से भीमाशंकर जाना था। अब हमें जल्दी से भीमाशंकर की बस बस पकड़नी थी अत: अपना सामान पेक करके करीब ग्यारह बजे होटल चेक आउट करके ओटो लेकर शिवाजी नगर बस स्टाप की ओर बढ चले।
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पुणे के होटल में चेक आउट के दौरान
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होटल के रिसेप्शन पर
पुणे का मार्केट बड़ा अच्छा लग रहा था लेकिन समय के अभाव के कारण कुछ विशेष खरीदारी  नहीं कर पाए। बातों बातों में ओटो वाले ने बताया की पुणे से और कुछ खरीदो या न खरीदो लेकिन यहां का लक्ष्मीनारायण चिवड़ा जरूर लेकर जाना, बहुत प्रसिद्ध है. एक बार खाओगे तो खाते रह जाओगे। खैर..

श्रावण में शिव दर्शन (इन्दौर से पुणे )

नवम्बर 2011 कि बात है, अपनी ज्योतिर्लिंग यात्रा के अगले स्थान के रुप में हमने चुना था भिमाशंकर को। विशाल राठोड़ से उस समय फोन पर बहुत लंबी बातें हुआ करती थीं, ऐसे ही एक दिन घुमक्कड़ी पर चर्चा करते हुए मैने विशाल को अपने भिमाशंकर जाने के प्लान के बारे में बताया, चुंकी उस समय तक हम लोगों की मुलाकात नहीं हुई थी और हम दोनों ही कोशिश में थे की परिवार सहित कहीं मिला जाए, मेरे भिमाशंकर जाने की बात सुनते ही विशाल बोला कि यार भिमाशंकर तो हमें भी जाना है क्युं ना भिमाशंकर में ही मुलाकात की जाए और बस उसी समय दिन, दिनांक समय आदी तय करके हम दोनों ने अपने अपने परिवारो सहित ट्रैन मे आरक्षण करवा लिया।
तय कार्यक्रम के तहत मुझे अपने परिवार के साथ इन्दौर से तथा विशाल को मुम्बई से पुणे पहुंचना था और वहां से साथ में भिमाशंकर। हम लोगों को तो यह प्लान बहुत पसंद आया था लेकिन भोले बाबा न तो हमें अपने दर्शन देना चाहते थे और न ही दोनों की मुलाकात होने देना चह्ते थे। हुआ युं की हमारे निकलने वाले दिन से कुछ तीन चार दिन पहले मेरी बहुत जबर्दस्त तबियत खराब हुई, मैनें ये बात विशाल से कही और हम दोनों ने आरक्षण रद्द करवा दिए। बिमारी का आलम ये रहा की जो बैग हमने टूर के लिये तैयार किये थे उन्हें लेकर हमें अस्पताल जाना पड़ा और पूरे दस दिन मुझे अस्पताल में भरती रहना पड़ा।
मार्च २०१२ में मैने फिर भिमाशंकर जाने के लिये इन्दौर से पुणे की इन्डिगो की फ़्लाईट में हम चारों का आरक्षण करवाया, लेकिन इस बार फ़िर हमारा प्लान चौपट हो गया, संस्क्रती की सी.बी.एस.ई. की परीक्षा की तारिखें आगे बढ जाने से हमें फिर आरक्षण कैंसल करवाना पड़ा। अब ये हमारे लिये सोचने का विषय था की आखिर ऐसा भिमाशंकर के केस में ही क्यों हो रहा है? क्यों बार बार ये यात्रा कैंसल हो रही है?
लेकिन आखिर भक्ति भी कहीं हार मानती है? भक्ति के आगे तो भगवान भी झुक जाते हैं। हम भी हार नहीं मानने वाले थे, इस बार अगस्त में फ़िर इन्डिगो की फ़्लाईट का पुणे के लिए रिजर्वेशन करवाया। और इस बार हमें भगवान भिमाशंकर के सफ़लता पुर्वक दर्शनों के अलावा पुणे के दगड़ुशेठ गणेश जी, त्र्यंबकेश्वर तथा साईं बाबा के दर्शन करने का सौभाग्य भी मिला।
मेरा जन्मदिन अगस्त में आता है और इस यात्रा का योग भी अगस्त में ही बन रहा था अत: मैंने सोचा की क्यों न इस बार अपना जन्मदिन बाबा भिमाशंकर के मंदिर में पूजन अभिषेक के साथ ही मनाया जाए, और बस इसी सोच के साथ तारिख भी तय हो गई, मेरा बर्थ डे 8 अगस्त को है अतः 7 अगस्त को इन्दौर से निकालना निश्चित हुआ ताकि आठ को हम भीमाशंकर पहुंच सकें।
श्रावण के महीने में जन्मदिन वाले दिन भगवान भोलेनाथ के दर्शन, भला इससे अच्छी क्या बात हो सकती है? आजकल हम लोगों ने बर्थ डे पर पार्टी वगैरह करना बंद कर दिया है, और कोशिश करते हैं की यह पावन दिन हम किसी मंदिर में पुजा पाठ के साथ मनायें, खैर, रिजर्वेशन वगैरह करवाने के बाद अब उस दिन का इन्तज़ार था जिस दिन हमें यात्रा के लिये निकलना था।
इस यात्रा को लेकर मन में बहुत संशय था, पता नहीं हो पायेगी भी या नहीं, एन टाइम पर कुछ भी लफ़ड़ा हो सकता है, क्योंकि ये यात्रा दो बार पहले कैंसल हो चुकी थी। खैर, वो कहते हैं ना की जहां चाह होती है वहां राह निकल ही आती है, और अन्तत: हमारी यात्रा वाला दिन आ ही गया।
यह मेरी तथा मेरे परिवार की पहली हवाई यात्रा थी अतः एक्साइटमेंट का लेवल बहूत हाई था, सबसे ज्यादा बच्चों में। सात अगस्त को शाम ६.५० पर हमारी फ़्लाइट इन्दौर ऐयरपोर्ट से निकलने वाली थी। दरअसल यह एक कनेक्टिंग फ़्लाइट थी, इन्दौर से नागपुर तथा नागपुर से पुणे,  नागपुर एयरपोर्ट पर दो घंटे का विश्राम था और रात लगभग ग्यारह बजे फ़्लाइट पुणे पहुंचने वाली थी।
इंसान की ख्वाइशें हर पल नयी होती रहती है कभी यह चाहिए कभी वह, ऊपर नील गगन में उड़ते उड़नखटोले को देख कर बैठने की  इच्छा हर दिल में होनी स्वाभाविक है, सो हम सब के दिल में भी थी …कब दिन आएगा यह बात सोचते सोचते वर्षों बीत गए, लेकिन मन में यह विश्वास था की वो दिन आयेगा जरुर और फिर वह दिन आ गया ….पहली हवाई यात्रा थी, दिल में धुक धुक हो रही थी कैसे जाना होगा ..क्या क्या करना होगा

Om Beach,Gokarna – ॐ बीच,गोकर्ण

ॐ बीच पर बीती एक शाम और मुकेश के साथ जबरदस्त विवाद 

ॐ बीच
मैं शिरसी और सहस्रलिंग के दर्शन करके कुछ 2:00-2:30 बजे लौटा था। खाना खाते-खाते मुझे तीन बज गए, अब हमारी कर्णाटक की यात्रा के केवल 24 घंटे ही बचे थे। अगले दिन 4.00 बजे हमें कुम्ता पहुँचना था, जहाँ से हमें मुंबई के लिए ट्रेन पकडनी थी। तो अब मेरी कर्नाटक की यात्रा समाप्त होने जा रही थी। यात्रा के आखरी 24 घंटे मुझे अच्छे नहीं लगते, यात्रा शुरू करते वक्त बहुत उत्साह रहता है कि क्या-क्या करेंगे? कैसे घूमेंगे? आदि-आदि, लेकिन यात्रा के आखरी पल में मेरे मन में उदासी छा जाती है। ऊपर से रूम पर भी थोड़ी उदासी का माहौल था। मैंने आते ही सोनाली और मुकेश से पूछा कि कैसा रहा दिन? तो उन्होंने कहा कि बहुत बढ़िया रहा। उन्होंने पंडित द्वारा सुबह में श्री गोकर्ण महाबलेश्वर का अभिषेक किया और फिर मंदिर के सामने जो बीच है उसमे स्नान किया। मैंने कहा ठीक है चलो शिरसी और सहस्रलिंग नहीं आये तो मजा तो आया उनको। तब मैंने कहा कि चलो ॐ बीच चला जाये। चलो इस बार उन्होंने हाँ कहा तो मैं सीधे होटल से बाहर निकल गया और कार या ऑटो ढूँढने लगा। मुझे एक मारुती ओमनी वैन मिली जिसे मैंने 3-4 घंटे के लिए मात्र तीन सौ में बुक कर लिया। फिर हम चल दिए ओम बीच पर। हम कुल 20 मिनिट में ॐ बीच पहुँच गए। बीच पर जाने वाला मार्ग भी काफी सुन्दर है, पहाडों के ऊपर से होकर जाता है. मैंने एक जगह पर रूककर काफी तस्वीरे ली थी।

खूबसूरत मुरुडेश्वर में एक दिन

मुरुडेश्वर में बीता एक मनोरंजक दिन
हम कुछ ९.३० बजे इडागूंजी से वापस आये मुरुडेश्वर में और उस दिन एकादशी थी. आते ही रिक्शा में से हमने फोन लगाया मुकेश को कि उनका परिवार तैयार हुआ है कि नहीं. तो पता चला कि वे लोग मंदिर परिसर में है. हम लोग पहले हमारे गेस्ट हाउस में गए. हमें पता था कि हमें समुन्दर में नहाना है. तो उसके लिए मैं नारियल का तेल शारीर पर लगाता हूँ .इससे समुद्री खारे पानी का असर कम हो जाता है . सनबर्न नहीं होते और त्वचा टेन (tan) ज्यादा नहीं होती. हम घर से बाहर  निकले तो हम भी मंदिर में गए दर्शन के लिए. वैसे भी दर्शन केवल मैंने ही किये थे . सोनाली ने नहीं. तो सोनाली और आर्या को दर्शन कराने में ले गया. साथ साथ मै रास्ते  पर फोटो सेशन भी करने लगा. पंचवटी गेस्ट हाउस से लेकर मंदिर परिसर और समुन्दर.आज के लेख में आपको ज्यादा चित्र ही दिखेंगे क्यूंकि ज्यादातर मुरुडेश्वर का विवरण मैंने पहली पोस्ट में ही कर दिया है. आइये अब चित्रों के दर्शन कीजिये.

पंचवटी गेस्ट हाउस के आगे बाग
अब पहुचे मंदिर में