Friday, 4 October 2013

भगवान एकलिंग जी दर्शन

दोस्तों इस श्रंखला की पिछली कड़ी में मैने आपलोगों को बताया था की श्रीनाथ जी के राजभोग दर्शन के बाद हम लोग ऑटो लेकर नाथद्वारा के कुछ अन्य स्थल देखने के लिये निकल गए थे अब आगे ……………..
लालबाग, श्रीनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के द्वारा बनवाया एक सुन्दर उद्यान है जहां कई तरह के फ़ुलों के पौधे, बच्चों के लिये झुले तथा मनोरंजन के अन्य साधन हैं, यानी सुकुन के कुछ पल बिताने के लिये इस उद्यान में सब कुछ है और छायाचित्रकारी के लिये तो यह उद्यान अति उत्तम है। जब हम यहां पहुंचे तो उस समय यहां हमारे अलावा और कोइ नहीं था, क्योंकि यह बाग दोपहर के बाद ही खुलता है। इस उद्यान में जी भर कर फोटोग्राफी करने के बाद हम अपने ऑटो में सवार होकर अपने अगले पड़ाव यानी गौशाला की ओर बढे।
नाथद्वारा का लाल बाग गार्डन
नाथद्वारा का लाल बाग गार्डन
नाथद्वारा का लाल बाग गार्डन

Monday, 30 September 2013

श्रीनाथ जी की हवेली ………….नाथद्वारा.

दोस्तों,
एक लम्बे अंतराल के बाद आज फिर उपस्थित हुं आप लोगों के सामने। आप सभी जानते ही हैं की मेरी घुमक्कड़ी का केन्द्र अक्सर धर्म स्थल ही हुआ करते हैं, और आज भी मैं आपलोगों को एक धार्मिक स्थल की ही सैर पर ले जा रहा हुं। चलिये आज हम चलते हैं भगवान श्रीकृष्ण के मनोहारी दर्शनों के लिये ……नाथद्वारा।
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जय श्रीनाथ जी – चित्र सौजन्य www.travelingbeats.com
नाथद्वारा के बारे में हम लोगों ने पहले से ही कई बार सुन रखा था और अब यहां जाने की इच्छा बलवती होती प्रतित हो रही थी, फ़िर एक बार घुमक्कड़ पर रितेश गुप्ता जी की नाथद्वारा की पोस्ट पढकर इस इच्छा को और हवा मिल गई।
मथुरा, व्रंदावन एवं वाराणसी कि यात्रा को सम्पन्न हुए कुछ ही समय हुआ था कि मन में फिर कहीं जाने की लालसा होने लगी। हमारे पड़ोस में एक परिवार है जो पुष्टिमार्गिय वैष्णव सम्प्रदाय से हैं और अक्सर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शनों के लिये नाथद्वारा जाते रहते हैं और वहां के बारे में बताते भी रहते हैं। अब चुंकि हमें भी अपने अगले डेस्टिनेशन के लिये कुछ निर्णय लेना ही था तो हमने सोचा कि क्यों न इस बार नाथद्वारा का ही रुख किया जाए, और वैसे भी नाथद्वारा हमारे घर से ज्यादा दुर नहीं है। बस ऐसा कुछ मन में चल ही रहा था, और फिर मैने गौर किया की कविता ने एक हफ़्ते में दो बार नाथद्वारा जाने की इच्छा जताई और बस ……..फिर क्या था मैनें फटाफ़ट दो घंटे में यात्रा योजना भी बना ली और आरक्षण भी करवा लिया।

Tuesday, 9 April 2013

बुद्धं शरणम गच्छामी ………….आइये सारनाथ चलें।

साथियों,
इस श्रंखला की पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की वाराणसी के प्रमुख मंदिर तथा रामनगर फोर्ट घुमने के बाद हम लोग होटल के अपने कमरे में आ गए तथा कुछ देर विश्राम के बाद गंगा के घाटों के दर्शन का आनंद उठाने के उद्देश्य से अब हम नाव में सवार हो गए थे और सारे घाट घुमने के बाद दशाश्वमेध घाट पर आकर जम कर बैठ गए, गंगा आरती का आनंद लेने के लिए। गंगा आरती में शामिल होकर ऐसा लग रहा था जैसे हमारा जीवन सफल हो गया। अब आगे ………………………
काम की बातें ........
काम की बातें ……..

आइये सारनाथ चलें
आइये सारनाथ चलें

वाराणसी के घाट एवं गंगा आरती

साथियों,
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा काशी/वाराणसी/बनारस में हमने करीब ढाई दिन बिताया था। काशी में हमारा पहला दिन दशहरे का दिन था और इसी पवित्र दिन हमने भगवान विश्वनाथ के दो बार दर्शन किये। अगले दिन सुबह उठकर सबसे पहले गंगा माँ की पहली झलक तथा स्नान के लिए हम अस्सी घाट पहुंचे तथा स्नान के बाद दुर्गा मंदिर, तुलसी मंदिर तथा अन्य मंदिर घूमते हुए हम BHU स्थित नवीन काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे तथा वहाँ से होते हुए रामनगर फोर्ट पहुंचे। अंत मे दोपहर तक अपने होटल पहुंचकर कुछ देर आराम किया तथा शाम करीब चार बजे हमने वाराणसी के घाटों के दर्शन की यात्रा प्रारंभ की ……….अब आगे।
मंदिरों के दर्शन तथा रामनगर फोर्ट से लौटने के बाद अब बाकी लोग होटल में अपने कमरे पर आराम कर रहे थे और मैं निकल पडा होटल के समीप स्थित शिवाला घाट की ओर जहां मुझे एक नाव वाले से बात करनी थी घाटों की यात्रा के लिए। जैसे ही मैं घाट पर पहुंचा मुझे एक नौजवान अपनी नई नवेली नाव की सफाई करता दिखाई दिया, मैंने उससे बात प्रारंभ की और अपना उद्देश्य बताया तो उसने मुझे चार घंटे में सारे घाटों की सैर करवा कर अंत में गंगा आरती में नाव मैं ही बैठ कर शामिल करवाने का वादा किया और चार्ज बताया सात सौ रुपये जिसे थोड़ी सी बातचीत के बाद उसने स्वयं ही घटा कर पांच सौ कर दिया। इस सहृदय नाविक का नाम था अजय।

गंगा में नौका विहार
गंगा में नौका विहार

खैर नाव का प्रबंध करके मैं वापस होटल आ गया तथा बाकी लोगों को जल्दी तैयार होकर शिवाला घाट चलने को कहा। कुछ देर में ही फटाफट सब लोग तैयार हो गए तथा कुछ जरुरी सामान एक बैग में लेकर हम घाट पर चल दिए। वहाँ अजय हमारा इंतज़ार कर रहा था। अब तक वह नाव की चकाचक सफाई कर चुका था। इस समय लगभग चार बज रहे थे और हमारा नाव का सफ़र प्रारंभ हो चुका था। अजय हमारा नाविक होने के साथ साथ गाइड का काम भी कर रहा था, उसने हमें बताया की आरती की तैयारी तो चार बजे से शुरू हो जाती है लेकिन आरती शाम साढ़े छह बजे शुरू होती है जो की लगभग आठ बजे तक चलती है। हमने सुन रखा था की यह आरती बहुत ही भव्य तथा वैभवशाली होती है अतः हम सभी गंगा आरती को लेकर बड़े ही उत्साहित थे।
वाराणसी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। वाराणसी के घाट गंगा नदी के धनुष की आकृति होने के कारण मनोहारी लगते हैं। सभी घाटों के पूर्वार्भिमुख होने से सूर्योदय के समय घाटों पर पहली किरण दस्तक देती है। उत्तर दिशा में राजघाट से प्रारम्भ होकर दक्षिण में अस्सी घाट तक सौ से अधिक घाट हैं।
वाराणसी दो नदियों के बिच बसा है वरुणा तथा असी इसीलिए इसका नाम (वरुणा + असी) = वाराणसी पडा है। अस्सी घाट प्रथम घाट है जहां से गंगा वाराणसी में प्रवेश करती है अतः यह घाट सभी घाटों में शुद्धतम है तथा यहाँ गंगा का स्वरुप भी साफ़ सुथरा तथा प्रदुषण रहित है।

Tuesday, 1 January 2013

काशी – भगवान विश्वनाथ एवं अन्य मंदिर दर्शन

दोस्तों,
पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की आगरा में मैं, रितेश गुप्ता जी एवं जाट देवता एवं हम सबके परिवार इकट्ठा हो गए थे तथा हम सब साथ में ताज महल तथा आगरा का लाल किला देखने गए थे। लाल किला देखने तथा वहां सबके साथ में बड़ा अच्छा समय व्यतीत करने के बाद सब अलग अलग हो गए। जाट देवता को मथुरा घुमने जाना था अतः वे अपने परिवार के साथ मथुरा चले गए और हम लोग रितेश जी के घर से अपना सामान लेकर तथा रात का खाना खा कर आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पहुँच गए जहाँ से हमें रात नौ बजे वाराणसी के लिए मरुधर एक्सप्रेस पकडनी थी। कहानी को आगे बढाने से पहले आइये हम सब एक साथ करते हैं काशी के भगवान विश्वनाथ के दर्शन ………… जय भोले।
जय काशी विश्वनाथ
जय काशी विश्वनाथ (Photo courtesy- www.eluniversosai.blogspot.com)