Thursday, 9 August 2012

Mumbai Tour Part -1 / मुंबई की सैर भाग -1 (सी.एस.टी. एवं बांद्रा बेंडस्टेंड)

दोस्तों, पिछली पोस्ट में मैंने आपको मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर तथा उससे लगे हुए एक अन्य प्राचीन मंदिर धाकलेश्वर महादेव मंदिर के बारे में बताया था, आइये अब इस पोस्ट में चलते हैं मुंबई के कुछ और पर्यटन स्थलों की सैर करने के लिए……………….
20 मार्च 2012 मंगलवार शाम करीब 5 बजे  कर्नाटक के कुमता से हमारी मुंबई के लिए ट्रेन थी मेंगलोर मुंबई SF एक्सप्रेस जिसने हमें सुबह लगभग 6 बजे मुंबई पहुंचा दिया.

मुंबई में मुकेश - ऐश ही ऐश


Friday, 27 July 2012

महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई /Mahalakshmi Temple, Mumbai


जय महालक्ष्मी माँ
पिछली पोस्ट में मैंने आपको बताया था की किस तरह से हम सुबह से महालक्ष्मी मंदिर के दर्शनों के लिए निकले थे और गुडी पड़वा का त्यौहार होने की वजह से अत्यंत भीड़ थी और हमने हाजी अली दरगाह की ओर रुख कर लिया था. अगले दिन फिर सुबह से हम सब तैयार होकर निकल पड़े महालक्ष्मी देवी के दर्शन के लिए.
सुबह का समय था और आज अपेक्षाकृत भीड़ भी बहुत कम थी अतः हमें मंदिर में पहुँचने तथा दर्शन में बहुत कम समय लगा. मंदिर बहुत ही सुन्दर है, एक बात मंदिर परिसर की जो मुझे बहुत अच्छी लगी वो थी मंदिर परिसर में सभामंड़प के ठीक सामने बैठकर दो तीन लोग शहनाई पर बड़ी अच्छी धुन बजा रहे थे, इतना सुन्दर संगीत की बस सुनते ही रहने का मन कर रहा था.

Tuesday, 10 July 2012

हाजी अली दरगाह-मुंबई / Haji Ali Dargah-Mumbai

साथियों, इस श्रंखला की पिछली कड़ी में मैंने आपको अपनी मुंबई यात्रा की शुरुआत और मुंबई की जीवन रेखा कही जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेन्स के बारे में बताया था, और अब आपको लिए चलता हूँ मुंबई के कुछ चुनिन्दा पर्यटन स्थलों की ओर. मुंबई वैसे तो पर्यटन की द्रष्टि से इतना समृद्ध है की इसे इत्मिनान से निहारने के लिए कम से कम दस से बारह दिन का समय तो चाहिए ही लेकिन हमारे पास समय कम होने की वजह से मेरे मित्र विशाल ने हमारे घुमने के लिए कुछ ख़ास जगहों को चुन कर रखा था. वैसे विशाल ने इस मामले में मुझसे हमारी मर्जी भी जननी चाही थी, सो मैंने बचपन से मुंबई की जिन टूरिस्ट जगहों का नाम सुन रखा था उनमें से कुछ को देखने की इच्छा प्रकट की और इन्ही में से एक जगह थी हाजी अली की दरगाह.

सबसे पहले हाजी अली दरगाह का ये सुन्दर चित्र.


Tuesday, 5 June 2012

Mumbai Local / मुंबई लोकल: माया नगरी की जीवन रेखा

दोस्तों, अपने धार्मिक यात्रा वृत्तांतों से अलग आज मैं आप लोगों को भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई जिसे मायानगरी भी कहा जाता है की जीवन रेखा यानि मुंबई उपनगरीय रेल व्यवस्था (मुंबई लोकल) तथा उससे जुड़े मेरे अनुभवों के बारे में बताना चाहता हूँ.
हमारी मुंबई यात्रा वस्तुतः मेरे तथा विशाल राठोड़ (जो घुमक्कड़ के एक वरिष्ठ लेखक हैं) के परिवार की सम्मिलित तटीय कर्नाटक यात्रा (उडुपी – कोल्लूर- मुरुदेश्वर- गोकर्ण) के परिणामस्वरूप थी. हमें अपनी कर्नाटक यात्रा के लिए योजना के अनुसार पहले विशाल राठोड़ के घर मुंबई जाना था तथा वहां से दोनों परिवारों को उडुपी के लिए प्रस्थान करना था.
अपने इस चार दिवसीय मुंबई प्रवास के दौरान मुंबई में हमने विशाल राठोड़ के मार्गदर्शन में उन्हीं के साथ मुंबई के कुछ चुनिन्दा दर्शनीय स्थलों का भ्रमण तथा अवलोकन किया जैसे हाजी अली की दरगाह, सिद्धि विनायक मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, तारापुरवाला एक्वेरियम, बांद्रा बेन्डस्टेंड, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताजमहल होटल, गेटवे ऑफ़ इंडिया, बाबुलनाथ मंदिर, मुकुटेश्वर मंदिर, इस्कोन मंदिर, एंटेलिया (मुकेश अम्बानी का निवास), मन्नत (शाहरुख खान का निवास), जलसा तथा प्रतीक्षा (अमिताभ बच्चन के दोनों निवास), बसेरा (रेखा का निवास), इम्पीरियल टॉवर्स तथा अन्य कई दर्शनीय स्थल.

मुंबई लोकल का पहला सफ़र (मैं, विशाल, संस्कृति एवं शिवम्)


Friday, 1 June 2012

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है. By Kavita Bhalse


जय नागेश्वर
सभी घुमक्कड़ साथियों को कविता की ओर से ………ॐ नमः शिवाय……….इस श्रंखला की पिछली पोस्ट में मैंने आपलोगों को भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका का परिचय करवाया. और आइये अब मैं आपलोगों को लेकर चलती हूँ श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जो की द्वारका से ही लगा हुआ है…….


जय नागेश्वर
जैसा की आपलोग जानते हैं की द्वारका से करीब 16 किलोमीटर की दुरी पर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है, द्वारका के आसपास स्थित दर्शनीय स्थलों के दर्शन के लिए जो बस चलती है वही बस रुक्मणि मंदिर के दर्शन के बाद यात्रियों को नागेश्वर ज्योतिर्लिंग लेकर जाती है तथा वहां से गोपी तालाब होते हुए बेट द्वारका जाती है. हमने भी बेट द्वारका सहित अन्य स्थलों के दर्शनों के लिए बस में बुकिंग करवाई थी (जिसका वर्णन मैंने अपनी पिछली पोस्ट में किया है). सारे सहयात्रियों के साथ पहले दिन हमने भी नागेश्वर के दर्शन किये लेकिन यह बस यहाँ सिर्फ 15 मिनट के लिए रुकी थी और हम जैसे शिव भक्तों के लिए ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन के लिए यह समय पर्याप्त नहीं था अतः अगले दिन हमने अलग से नागेश्वर मंदिर आने की योजना बना ली.